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14 Nov 2025 · 1 min read

कुछ नहीं मिलता

मुक्तक
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तबाही से किसी को कुछ नहीं मिलता।
भयंकर आंधियों में पेड़ है ढहता।
वही बर्बादियों के बीज है बोते।
भले कार्यों में जिनका मन नहीं लगता।
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धमाके देश में जब-तब किया करते।
बिना कारण बहुत जानें लिया करते।
लिया करते यही शिक्षा क्यों नापाकी।
तबाही के लिए ही ज्यों जिया करते।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य

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