Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
13 Nov 2025 · 2 min read

भौतिकी की पुस्तक

शहर से कुछ दूर, एक सुनसान रास्ता फैला हुआ था। रास्ते के किनारे एक विशाल, पुराना पीपल का पेड़ खड़ा था, जिसकी छाया में चार पुस्तकें पड़ी थीं—अर्थशास्त्र, साहित्य, दर्शन और भौतिकी।
सुबह की पहली धूप में कुछ लोग उस रास्ते से गुज़र रहे थे। उनके कदम अचानक रुक गए। इतनी कीमती किताबें खुले में पड़ी थीं, यह देखकर उनकी जिज्ञासा और बढ़ गई। उन्होंने एक-एक करके किताबों को उठाया—अर्थशास्त्र, साहित्य, दर्शन… पर चौथी पुस्तक—भौतिकी—वहीं पड़ी रह गई। किसी ने उसे छुआ तक नहीं। लोग केवल देखते ही रह गए, जैसे उसमें कुछ ऐसा था जो छूने से डराता हो।
अंततः किसी ने पुलिस को फोन किया और पूरे दृश्य की जानकारी दी। थोड़ी देर बाद पुलिस की गाड़ी वहाँ पहुँची। पर असली आश्चर्य तब हुआ, जब पुलिस के साथ सेना की गाड़ी भी आई।
थोड़ी दूरी पर एक वृद्ध और उसके साथ एक युवा विद्यार्थी यह दृश्य देख रहे थे। विद्यार्थी ने हल्की हिचकिचाहट के साथ पूछा,
“सिर्फ एक किताब के लिए सेना? क्या भौतिकी इतनी खतरनाक है?”
वृद्ध की आँखों में एक अजीब सा सन्नाटा था। फिर कुछ पल चुप रहकर धीमे स्वर में बोला,
“लोगों ने भौतिकी में केवल ओपेनहाइमर को देखा। उसकी प्रतिभा इतनी विराट थी कि धरती में कम्पन पैदा हुआ। एक झटके में लाखों लोगों की जानें चली गईं। और वह कम्पन… मानव जाति के अस्तित्व के लिए हमेशा के लिए खतरा बन गया। भौतिकी—ओपेनहाइमर का घर है, उसकी प्रतिभा का केंद्र। यही वजह है कि इसे यहाँ अकेला नहीं छोड़ा जा सकता।”
विद्यार्थी ने कांपते हुए किताब की ओर देखा। अब सब कुछ साफ और भयावह हो गया था।

~ प्रतीक झा ‘ओप्पी’
इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज

Loading...