प्रियवर...............
अगर तहरीर ऐसी हो
जो रंगों का कवल समझें
मैं कोरा कागज भी बन जाऊ
जो उसमें रंग तू भी भर दे
मैं नवल किशोरी से
मृदुल भी बन जाऊ
जो तू मृदुलता क़ो
परखने का सबाब बन जाये
मैं निर्मम स्तम्भ से
वृंत भी बन जाऊ
जो तुम अगम बनने का
सलूक सिख जाओ
मैं नीर सरिता से
निर्झर भी बन जाऊ
जो तुम सागर कि मिलावटो मे
मेरी छाप छोड़ जाओ
मैं सौम्य स्वभाव से
प्रेमिका भी बन जाऊ
जो तुम नखरे उठाके
प्रियवर बन जाओ
दीपिका सराठे