गिले-शिकवे..!
” गिले-शिकवे हज़ारों हों पर कभी खत्म यकीं ना हो,
भले रूह बदन से हो रुख़सत मग़र आंखों में नमीं ना हो,
मेरे दिल के आईने में तेरी सूरत बसे दिलबर,
ख़ुदा इतनी करम करना, मेरी चाहत में कमीं ना हो ।”
-✍️ सुहानता ‘शिकन’