Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
13 Nov 2025 · 1 min read

शीर्षक : प्रियतम पाती प्रेम की

शीर्षक : प्रियतम पाती प्रेम की
———-*******———–
लिखा प्रेम की पाती प्रियतम,
पढ़ी प्रिया अनुराग।
नीर लगा नयनों से बहने,
उठी विरह की आग।
आती जैसे सुधि प्रियतम की,
उठते मन्मथ जाग।
आतुर मन में चाह मिलन की,
लिखा नहीं पर भाग।।
फड़क उठे जो अंग बाम यों,
बोल मुँडेरा काग।
मन मंदिर में बजती घंटी,
पुष्प खिले ज्यों बाग।।
आकर गुजर गया बसंत भी,
जगा न मन में राग।
प्रियतम जिनके दूर देश में,
कैसे गाए फाग।।

__ अशोक झा ‘दुलार’

Loading...