प्रभु ! हम भी चैनल बना लें?
व्यंग्य
प्रभु ! हम भी चैनल बना लें?
कौन रहेगा? कौन जाएगा ? इसका अधिकार धरती को मिलना चाहिए। भगवान के पास काम बढ़ गया है। आंख खुलती है तो नीचे हाथ जोड़े बंदे। हाथ पसारे बंदे। हाथ फैलाए बंदे। सब मांग रहे हैं? पृथ्वी पर हाहाकार।
नारायण ने नारद जी को बुलाया। प्रिय नारद! तुम तो कहते थे..पृथ्वी पर सब ठीक चल रहा है। आटा, दाल, चावल सब फ्री में बंट रहा है। बिजली पानी भी फ्री है। फिर ये उथलपुथल क्यों?
प्रभु! जिसको जितना मिलता है, वहीं व्याकुल होता है। सबसे तेज चैनलों की खबर है..कोई दुखी नहीं। सरकार पिछली सरकारों से अच्छा काम कर रही है।
ऐसा कैसे हो सकता है नारद? अगर सब ठीक है तो ये हाथ उठाए मुझसे क्या मांग रहे है? जिसे देखो, वही मांग रहा है?
श्रीमन! ये अपने अधिकार मांग रहे हैं। आपने जो चीजें अपने पास रखी हैं, वे धरती को लौटा दें?
तुम्हारा क्या अभिप्राय है, नारद?
प्रभु। जन्म, मृत्यु, लाभ हानि, हवा धूप सब आपके पास है? ये धरती को दे दें। पुण्य होगा?
यह कैसे हो सकता है? कदापि नहीं।
प्रभु! जो जिद आपकी है। वहीं धरती की है। देखिए। आपके इन सारे कामों के रजिस्टर कहां हैं? आपके पास है कोई डेटा?
जन्म मृत्यु रजिस्टर धरती के पास। धूप हवा की गणना मौसम विभाग करता है। पल पल की खबर कौन देता है? धरती। आपके पास तो सिर्फ आत्मा है। जो धरती पर दिखाई नहीं देती।
नारायण ने चित्रगुप्त को बुलाया।
चित्रगुप्त! जन्म मृत्यु, लाभ हानि, धूप हवा का डेटा लाओ!
चित्रगुप्त-“सर। इनका डेटा नहीं है। समय पूरा हो गया है। लेकिन लोग धरती से आना नहीं चाहते। लाभ हानि का काम सरकार देखने लगी है। धूप हवा का निर्धारण कोर्ट करती है?”
“फिर हम यहां किसलिए बैठे हैं?” प्रभु ने गुस्से में कहा।
चित्रगुप्त- सर। हमारी प्लानिंग लीक हो रही है। कुछ लोचा है। यमराज जी बता रहे थे, उनका काम भी चैनल वालों ने अपने हाथ में ले लिया। अच्छे भले आदमी को मृत घोषित कर दिया? लोग श्रद्धांजलि देने लगे।
नारायण हरि ने नारद की ओर देखा। नारद जी समझ गए, क्लास लगेगी अब।
नारायण- यह डिपार्टमेंट तो तुम्हारा है। तुम इसके सीईओ हो। गलत खबर कैसे चल गई? सत्यकाम के हीरो के साथ असत्य? धर्मेंद्र को क्यों मारा?
( यमराज तपाक से बोले, सर हमने नहीं, चैनल वालों ने मारा)
नारद- “इन पर हमारा कोई जोर नहीं। ये हमारी नहीं सुनते। सरकार की सुनते हैं। तभी तो सर, कह रहा हूं अपने अधिकार बांट दो। जिन पर हमारा जोर नहीं, उनको रखने से क्या लाभ?”
नारायण! नारायण!
नारायण- बांटने को तो बांट दूं। दुरुपयोग होगा। लोग डेथ पर स्टे ले लेंगे। पॉलिटिकल डेथ फिजिकल डेथ हो जाएगी। अभी तो लोग हमसे डरते हैं। फिर, हाथ जोड़ना भी बंद कर देंगे।
नारद-प्रभु ! यही संकट है। सब अपनी पूजा कराना चाहते हैं। प्रभु! क्यों न हम भी अपना चैनल बना लें? आप बेवजह लोगों की टीआरपी बढ़ा रहे हैं। हम अपने व्यूज क्यों न बढ़ाएं? वीकली यमराज के पॉडकास्ट देते रहेंगे।
सूर्यकांत
13.11.2025