नादान
कितने नादान है प्रेम के जुगनूओ
प्रेम है किन्तु उस मे समर्पण नहीं
दौर यें हो चला चाँद गर्दिश मे है
और जुगनू ने महफिल सजायें रखी है
प्यार मे कोई रानी दीवानी बनी है
प्रेम मे कोई राजा परवान चढ़ा है
ना कीमत है इसकी अब इस जहाँ मे
तितलियो की महफिल सजाये रखी है
कौन है किसका ना इनको पता है
हिचकियो के तराना यें गाते फिरे है
जब बंधन मे आये तो जाना है इनने
ना इनके तराने कौई राग लिए है
दीपिका सराठे