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13 Nov 2025 · 1 min read

कुण्डलिया छंद

!! श्रीं !!
सुप्रभात!
जय श्री राधेकृष्ण !
शुभ हो आज का दिन !
🙏
चिन्तन सुलझाता सदा, उलझन करता दूर।
उलझा गुच्छा सुलझता, कोशिश कर भरपूर ।।
कोशिश कर भरपूर, तोड़़ नव छोर बनाना।
धीरे-धीरे उसे, सुनो सुलझाते जाना।।
चिन्ता को दें त्याग, दूर हर होगी उलझन।
याद रखें यह बात, सदा सुलझाता चिन्तन ।।
***
महेश जैन ‘ज्योति’,
मथुरा।
🌷🌷🌷

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