शीर्षक:- मौत का बहाना
शीर्षक:- मौत का बहाना
रचनाकार:- शाहबाज आलम “शाज़”
सफ़र ए “शाज़” में,
मेरे स्कूल के दोस्त से मुलाक़ात हो गई,मिलते ही दिनों में,
बीते दिनों की सारी बात हो गई।
वो कमबख़्त मेरे सामने विमल पान मसाला चबा रहा था,
और मैं उसके सामने दूध का गिलास उठा रहा था।
मैंने कहा –
“दोस्त! तू तो अब बदल गया है,
पान-मसाले में ज़हर घोलने लगा है!”
वो बोला –
“शाज़, मत समझा, ज़्यादा जीयोगे,
मैं खा रहा हूँ, खाकर ही मरूँगा,
जब मौत आएगी –
तुम्हें भी आएगी,
मुझे भी आएगी।
गुटखा कोई फ़र्क नहीं डालता,
नशा करने वाला भी मरता है,
नशा छोड़ने वाला भी मरता है!”
मैं मुस्कुराया, फिर बोला –
“मौत तो बहाना है,
वो तो किस्मत का तराना है,
पर जो खुद से मर जाए,
वो ज़िन्दगी नहीं, वो अफ़साना है।
जो नशे में खुद को मिटा दे,
वो इंसान नहीं, इल्ज़ाम है,
खुदा की दी ज़िन्दगी का,
यूँ कत्ल करना ,आत्महत्या का नाम है!
(शाहबाज आलम शाज़ युवा कवि स्वरचित रचनाकार सिदो-कान्हू क्रांति भूमि बरहेट सनमनी निवासी)