उस लय से छंद बनाती हूँ
उस लय से छंद बनाती हूँ….
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शब्दों के मोती चुन -चुन कर
भावों से गीत सजाती हूँ ।
धड़कन की भाषा सुन लेती
प्रीत तभी लिख पाती हूँ।।
कठिन परिश्रम पूजा मेरी,
कर्म इबादत कर लेती हूँ।
त्याग ,तपस्या, प्रेम -वेदना
सह गीत खुशी के गाती हूँ।।
दर्दों को दे कर अपनापन ,
मुस्कानों से सहलाती हूँ।
घावों में भर लेती चंदन,
मैं जीत समय को जाती हूँ।।
पीर विरह की अद्भुत ,अनुपम,
साँसों से मैं दुलराती हूँ।
अनहद -नाद बजे जब घट में,
उस लय से छंद बनाती हूँ।।
डॉ . रागिनी स्वर्णकार ,शर्मा
इंदौर🖋