गांव री गुवाड़ी
मनडो करै ह,
गांव जाय’र, घर री चौखट माथो टैक आऊं।
घरां माहीं बनयोडी बा रै हाथ री, चाय पी’र आऊं।।
छनिक देर रेऊ उण दिवारी म, जठै बाळपणो बित्यो हो।
थोड़ी’क बाता कर’ल्यू आंगण सूं, वठै प्रेम सूं गोठ जिम्या हा।।
छनिक टैम निहार लू, उण री ऊजळी शाम नै,
ढळतां सूरज अर चिडकळी रामूड्या नै।।
परदेसा री चाकरी घरां अर अपणा सूं छैठी करै ह,
जैब तो भर दैवे ह, पण हिवडा नै सूना कर दैवे।।
टका रो सुख केवल मन नै रिजावै ह,
हियां माथै मंड्यां चित्राम, टका सूं नांही बण पावै है।।
🙂🙂🙂🙂🙂
आपका अपना
लक्की सिंह चौहान
बनेड़ा (राजपुर)