Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
12 Nov 2025 · 1 min read

इक दिया प्यार का , घर जला कर गया

ताज़ा ग़ज़ल..

इक दिया प्यार का , घर जला कर गया ,
जाने क्यूँ बे वफ़ा , मुस्करा कर गया ।1/

चाँदनी रात थी , साथ परिवार भी ,
जाते जाते वो क्यूँ ,दिल हिला कर गया ।2/

रूठ जाता तो , अफ़सोस होता नहीं ,
मिलने आया था मुझसे, मिला कर गया ।3/

शरबती शाम थी , याद में खो गयी ,
हौले हौले वो , लम्हे सजा कर गया ।4/

हाथ में हाथ देकर , नसीहत भी की ,
यादे माज़ी वो आख़िर, जगा कर गया ।5/

इक महक आइ चलकर , फ़िदा हो गई ,
दिल की हर बात, फिर गुनगुना कर गया।6/

ढूंढना , चाहते हो , तो ढूंढो मुझे ,
बस यही कह , कहानी सुना कर गया ।7/

“नील” इक़रार करना , न आया तुम्हें ,
ग़म इसी बात का , वो दिखा कर गया ।8/

✍️ नीलोफर ख़ान नील रूहानी..

Loading...