इक दिया प्यार का , घर जला कर गया
ताज़ा ग़ज़ल..
इक दिया प्यार का , घर जला कर गया ,
जाने क्यूँ बे वफ़ा , मुस्करा कर गया ।1/
चाँदनी रात थी , साथ परिवार भी ,
जाते जाते वो क्यूँ ,दिल हिला कर गया ।2/
रूठ जाता तो , अफ़सोस होता नहीं ,
मिलने आया था मुझसे, मिला कर गया ।3/
शरबती शाम थी , याद में खो गयी ,
हौले हौले वो , लम्हे सजा कर गया ।4/
हाथ में हाथ देकर , नसीहत भी की ,
यादे माज़ी वो आख़िर, जगा कर गया ।5/
इक महक आइ चलकर , फ़िदा हो गई ,
दिल की हर बात, फिर गुनगुना कर गया।6/
ढूंढना , चाहते हो , तो ढूंढो मुझे ,
बस यही कह , कहानी सुना कर गया ।7/
“नील” इक़रार करना , न आया तुम्हें ,
ग़म इसी बात का , वो दिखा कर गया ।8/
✍️ नीलोफर ख़ान नील रूहानी..