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12 Nov 2025 · 1 min read

प्रकृति नहीं बदलती —

प्रकृति नहीं बदलती —
सूर्य अब भी हर दिन उगता है,
चाँद अब भी मुस्कुराता है,
तारे अब भी रोशनी बिखराते हैं।

पर इंसान…
वो पल भर में बदल जाता है,
जो कभी अपना था,
आज अजनबी नज़र आता है।

वो मुस्कान जो सुकून देती थी,
अब दर्द का कारण बनती है,
जो वादे सच्चे लगते थे,
अब यादों में धुंधले पड़ते हैं।

वृक्ष अब भी छाया देते हैं,
नदियाँ अब भी बहती हैं,
पर इंसान… अब वैसा नहीं रहा,
वो भूल गया वफ़ा, और ईमान का रास्ता।

स्वरचित,
रजनी उपाध्याय 🙏🌹

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