कुछ कदम
है परेशान भरी जिंदएगी
कांटों सा है हाल अपना
है वक्त अगर तेरी हक मैं
कुछ कदम तक दे साथ अपना ।
चले एक खामोश राहों में
हो कुछ दिलों के बात अपना
कुछ गुन गिनाए तू अपनी
मैं भी सुनाऊं कुछ हाल अपना ।
हो शामों की रंगीन चादर
ओर हो हवाओं से ताल अपना
हो चंद की खामोश चमक
ओर तारों सा हो हाल अपना ।
ओर लड़ के ज़माने भर से
चुरा लूं खुदा से कुछ पल अपना
हो वक्त तेरे हक मैं तो बता
कुछ कदम तक दे साथ अपना ।