आज हम सारे जहां तक आगये
आज हम सारे जहां तक आगये
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2122 2122 212
स्वप्न सारे आशियाँ तक आगये
हम कहां थे, अब कहाँ तक आगये
यूँ सजाई महफिलें तारों ने अब
जुगनू भी मिलने समां तक आगये
हौंसलों ने पंख हमको क्या दिए
हम जमीं से आसमां तक आगये
दर्द दिल में पल रहे थे अब तलक
गीत बन सबकी जबां तक आ गये
जो तमन्ना फूल के दिल में पली
भाव सारे गुलसितां तक आगये
देश आगे इस तरह बढ़ता रहा
आज हम सारे जहां तक आगये
डॉ .रागिनी स्वर्णकार ,शर्मा
इंदौर