बाल कविता -
बाल कविता –
सोना दीपक ले मुस्काती
खेलने को सबको बुलाती।
आओ मीना , शालू आओ
साथ में थोड़े आलू लाओ ।
घर -घर खेलेंगे सब मिलकर
तुम रखो सभी दीपक गिनकर।
पानी भी मैं लेकर आई
खाने को है दूध मलाई ।
यह खेल होते हैं निराले
बच्चे खेलें हो मतवाले ।
सोना की मुस्कान निराली
इसने भी मनाई है दीवाली।
मौलिक सृजन
पूनम दीक्षित
कृष्णा विहार कॉलोनी
ज्वाला नगर रामपुर
उत्तर प्रदेश