अब नहीं रुकना
गीतिका
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अब नहीं रुकना पँहुचना है शिखर पर।
ध्यान रखना है हमें अपनी डगर पर।
बात मन की जान लेते हैं यहां जो।
हर समय है शीर्ष ही उनकी नजर पर।
साहसी हैं जो समंदर में उतरते।
दृष्टि वो रखते हमेशा हर लहर पर।
ऋतु बसंती में खिलेगी खूब बगिया।
फूल आ जाते महकते हर शज़र पर।
जिन्दगी ख़ुशहाल बन जाती नहीं यूं।
काम है करना हमें प्रत्येक स्तर पर।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य