मालेगांव महाराष्ट्र - तीन वर्ष की बच्ची के साथ हैवानियत
“तलवारे आज मौन है,
यह इंसान भेष में कौन है ।
शायद घोर कलयुग की शुरुआत है ,
क्या बच्चियाँ भी हैवानियत की शिकार है ?
राम नहीं अब यहाँ कोई ,
क्या रावण का एक क्षत्र राज है ?
महाभारत हुए है यहाँ नारी खातिर ,
क्या युद्ध लड़ने वाले मृत्यु को प्राप्त है ?
लज्जा भंग हुई आज एक बच्ची की ,
क्या सुषुप्त यहाँ लोकतंत्र की सरकार है ?
आक्रोश भरा जन जन में , गुस्सा भरा मन मन में।
क्या अब भी रगो में लहू का उबाल है ?
शायद कुछ दिन हल्ला होगा,
क्या फिर मानुषीयत को न्याय है ?
ऐसे अनेक किस्से हुए और ना जाने कितने और हैवान होंगे ,
क्या वाकई नारी अबला और पुरुष महान है ?
नहीं होगा इन प्रश्नों का उत्तर,
और शायद उत्तर खोज पाना आसान ना होगा,
गंदी परवरिश के पले इन हैवानियत के कीड़ों का ,
क्या कोई सक्षम न्याय होगा ?
सोचता नीरज देश आजाद हुआ ,
सबको अधिकार मिला , सम्मान मिला ,
पर क्या ऐसे कीड़ों को मसला जाएगा ?
क्या इनको दुर्तग्रामी फाँसी का ऐलान होगा ?
कलम मेरी लिखना बहुत कुछ चाहती,
लेकिन फिर भी संविधान की सीमा मानती ,
पर क्या संविधान में भी ऐसे कुकृत्यों का हिसाब होगा?
क्या अब न्याय पालिका में भी तुरंत फरमान होगा ?
नीरज कुमार सोनी
“जय श्री महाकाल”