Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
12 Nov 2025 · 1 min read

चंद अशआर

आशियां होगा आंखों मे सागर सी गहराई है
दिल का मंजर कुछ और उसमें जगह कहां

मुट्ठी में बंद खुशियाँ बिखेर दो यारों
हथेलियां इक दिन खुली ही जानी हैं

नसीब करवाये कठपुतली का खेल
कलाकार कोई कमजोर नही होता

मुफ्त में मिले अभिभावकों का प्यार
बहुत कुछ कहीं सब कुछ चुकाना है

मुस्कुराओ हंसो खिलखिलाओ मगर बोलो
तब,जब शब्दों का वजन मौन से ज्यादा हो

कोई कितना भी करीबी क्यों न हो
वक्त के साथ सब लापता हो जायेगें

कोई गलत बोले तो मुस्कुरा देना
वो अपने नजरिये को बयां कर रहा

संघर्ष खत्म हुआ न शिकवों का दौर
खत्म हो रही वो है जिंदगी की डोर

रिश्तों की परवाह नही
वक्त हमारे पास नहीं

@ अश्वनी कुमार जायसवाल

Loading...