चंद अशआर
आशियां होगा आंखों मे सागर सी गहराई है
दिल का मंजर कुछ और उसमें जगह कहां
मुट्ठी में बंद खुशियाँ बिखेर दो यारों
हथेलियां इक दिन खुली ही जानी हैं
नसीब करवाये कठपुतली का खेल
कलाकार कोई कमजोर नही होता
मुफ्त में मिले अभिभावकों का प्यार
बहुत कुछ कहीं सब कुछ चुकाना है
मुस्कुराओ हंसो खिलखिलाओ मगर बोलो
तब,जब शब्दों का वजन मौन से ज्यादा हो
कोई कितना भी करीबी क्यों न हो
वक्त के साथ सब लापता हो जायेगें
कोई गलत बोले तो मुस्कुरा देना
वो अपने नजरिये को बयां कर रहा
संघर्ष खत्म हुआ न शिकवों का दौर
खत्म हो रही वो है जिंदगी की डोर
रिश्तों की परवाह नही
वक्त हमारे पास नहीं
@ अश्वनी कुमार जायसवाल