भाग्य भगवान और अपनों का शुक्रगुज़ार हूँ मैं
भाग्य भगवान और अपनों का शुक्रगुज़ार हूँ मैं
वो बार-बार गिराते रहे मैं बार-बार उठता रहा
बहुत टूटा बहुत दर्द हुआ बहुत बिखरा मगर
मुझे आज समझ आया कि यही तो पतझड़ है
भाग्य भगवान और अपनों का शुक्रगुज़ार हूँ मैं
वो बार-बार गिराते रहे मैं बार-बार उठता रहा
बहुत टूटा बहुत दर्द हुआ बहुत बिखरा मगर
मुझे आज समझ आया कि यही तो पतझड़ है