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11 Nov 2025 · 1 min read

भाग्य भगवान और अपनों का शुक्रगुज़ार हूँ मैं

भाग्य भगवान और अपनों का शुक्रगुज़ार हूँ मैं
वो बार-बार गिराते रहे मैं बार-बार उठता रहा
बहुत टूटा बहुत दर्द हुआ बहुत बिखरा मगर
मुझे आज समझ आया कि यही तो पतझड़ है

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