परी की प्रेरणा से लौटी हरियाली
बाल कहानी
बहुत समय पहले हरितपुर नाम का एक गाँव था। गांव का यह नाम प्राकृतिक हरियाली और सुंदरता के कारण ही पड़ा था। इतना सुंदर गाँव कि लोग उसे “धरती का नन्हा स्वर्ग” कहते थे। चारों ओर हरे-भरे पेड़, कल-कल करती नदियाँ और चिड़ियों की चहचहाहट हर सुबह को मधुर बना देती थी।
लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने प्रकृति की बात सुननी छोड़ दी। पेड़ों को काटा जाने लगा, नदियों में कूड़ा फेंका जाने लगा, हवा में धूल और धुआँ भर गया। जो गाँव कभी हरियाली से दमकता था, अब सूना और उदास दिखने लगा।
छोटी रीना रोज़ अपने बगीचे में खेला करती थी। अब वहाँ न तितलियाँ उड़ती थीं, न फूल खिलते थे। एक दिन उसने देखा कि उसके प्यारे आम के पेड़ की पत्तियाँ सूख रही हैं। वह उदास होकर बोली, “काश, कोई हमारी धरती को फिर से मुस्कुराहट लौटा दे!”
रात गहरी हुई तो रीना सो गई। अचानक एक हल्की हवा चली और कमरा हरी रोशनी से भर गया। रोशनी के बीच से एक सुंदर परी प्रकट हुई, उसके पंखों से फूलों की खुशबू फैल रही थी। “डरो मत रीना,” वह बोली, “मैं हरियाली परी हूँ। कोई भी बच्चा धरती की चिंता करता है, मैं वहाँ पहुँच जाती हूँ।”
रीना ने हैरान होकर पूछा, “लेकिन मैं अकेली क्या कर सकती हूँ?” परी मुस्कुराई, “शुरुआत हमेशा एक से होती है। जब तुम आगे बढ़ोगी, बाकी तुम्हारे साथ खुद चल पड़ेंगे।” उसने रीना को जादुई बीजों की एक थैली दी और कहा, “इन्हें प्रेम से बोना , ये सिर्फ पौधे नहीं, धरती की मुस्कान हैं। सबको सिखाना कि प्रकृति हमारी सच्ची दोस्त है।”
सुबह हुई तो रीना ने स्कूल में यह बात सबको बताई। बच्चे उत्साहित हो गए। सब मिलकर गाँव में जगह-जगह पेड़ लगाने लगे। उन्होंने कूड़ा अलग-अलग डिब्बों में डालना शुरू किया और बड़े-बुजुर्गों से भी बोले, “धरती हमारी माँ है, इसे बीमार मत करो।”
धीरे-धीरे हरितपुर फिर से हरा-भरा हो गया। नदियाँ साफ़ बहने लगीं, तितलियाँ लौट आईं, हवा में खुशबू फैल गई। एक शाम बच्चों ने देखा, आसमान में एक चमकदार तारा झिलमिला रहा था। सब समझ गए वह हरियाली परी है, जो उन्हें देखकर मुस्कुरा रही है। रीना ने आकाश की ओर हाथ जोड़कर कहा, “अब हमारी धरती फिर से मुस्कुरा रही है… और हम सब उसके रखवाले हैं!”
*संदेश: अगर हम ठान लें तो धरती फिर से हरी-भरी हो सकती है। पर्यावरण की रक्षा सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, हमारा प्रेम और नैतिक कर्तव्य भी है।*