अब तन्हाई नहीं सताती, सच्चाई बताती है।
अब तन्हाई नहीं सताती, सच्चाई बताती है।
जब कुरेदता हूं मैं, वक्त की रेत को।
सीने से लिपटती है, धीरे से वो कहती है।
मैं ही हूं तेरी हमसफर, पहले भी थी अब भी हूं।
वो तो छलावा था, तेरी आँखों का।
जिसे तूने ताउम्र, हमसफर समझा।
मुझे तूने ही, रहगुज़र समझा।
मैं ही हूं तेरी हमसफर, पहले भी थी अब भी हूं।
@श्याम सांवरा…