जिसको हमने माना अपना
जिसको हमने माना अपना, जिसको हमने प्यार किया।
हमको लूटा है उसी ने, जिसपे हमने एतबार किया।।
जिसको हमने माना अपना————————–।।
इज्जत जिसको अपनी समझकर, हमने की जिससे मोहब्बत।
अमानत उनकी हमने समझकर, हमने की जिसकी हिफाजत।।
करके शक हम पर उसी ने, हमको ही बदनाम किया।
हमको लूटा है उसी ने, जिसपे हमने एतबार किया।।
जिसको हमने माना अपना——————–।।
देखकर खुश वो हमें आज, करते हैं हमसे शिकायत।
हमसे तारीफ उनकी, उनसे करते हैं हमारी शिकायत।।
हमने तो अपने लहू से, उनको आबाद किया।
हमको लूटा है उसी ने, जिसपे हमने एतबार किया।।
जिसको हमने माना अपना—————–।।
क्या खता हमसे हुई है, हमने हर वादा निभाया।
हमसे कहाँ भूल हुई है, जिससे हमको यूँ भूलाया।।
फूलों से जिसका हमेशा, हमने स्वागत किया।
हमको लूटा है उसी ने, जिसपे हमने एतबार किया।।
जिसको हमने माना अपना——————-।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)