मुक्तक
नये से ख़्वाब ले आये ,नये अरमान ले आये
अजी हम आज महफ़िल में, नई मुस्कान ले आये
है ताज्जुब आसमानों को, दिखे जो हौंसलें इनके
कहाँ से पंख में पंछी, ये इतनी जान ले आये
डॉ .रागिनी स्वर्णकार शर्मा
नये से ख़्वाब ले आये ,नये अरमान ले आये
अजी हम आज महफ़िल में, नई मुस्कान ले आये
है ताज्जुब आसमानों को, दिखे जो हौंसलें इनके
कहाँ से पंख में पंछी, ये इतनी जान ले आये
डॉ .रागिनी स्वर्णकार शर्मा