फिर चढ़ी प्यार की ख़ुमारी है
चाँद रातों का कैफ़ ज़ारी है
फिर चढ़ी प्यार की ख़ुमारी है
हर नज़ारा लगे है घायल-सा
यार के नैन या कटारी है
जिस्म चंदन है चाँद-सा चेहरा
ख़ूबसूरत चुनर सितारी है
ख़ूब महके हैं लफ़्ज़ काग़ज़ पर
ये ग़ज़ल यार ने संवारी है
दिल से निकली हैं ‘रागिनी’ ग़ज़लें
हर ग़ज़ल यार तुम पे वारी है