झारखंड – पच्चीस साल का कमाल!
शीर्षक:- झारखंड – पच्चीस साल का कमाल!
✍️ रचनाकार – शाहबाज़ आलम “शाज़”
कभी था बिहार का हिस्सा प्यारा,
दो हज़ार में हुआ अलग अब है न्यारा!
कोयले, लोहे, और जंगलों की शान,झारखंड बना मेहनतकशों का मान।
सरहुल में ढोल बजे धम्म-धम्म,
करमा में थिरकते सब झम-झम!
टुसू की तान पे खेत मुस्काए,
सोहराय में घर-घर दीप जलाए।
हुंडरू, दस्सम के झरने बोले
“आओ भइया, ठंडक घोले!”
घने वन, झरने, हरियाली,
यहीं तो बसती है खुशहाली।
धोनी ने बल्ला घुमाया ऐसे,
दुनिया झुकी हमारे जैसे!
बिरसा की मिट्टी, सिदो कान्हू की जान,जयपाल ने दिखाया ओलंपिक मैदान।
साक्षरता बढ़ी, शिक्षा आई,
पर बिजली अब भी आँख मिचौनी कर पाई
फिर भी कहता झारखंड प्यार से —
“हम हैं नए, पर दम है हर वर्ग से!”
खनन, इस्पात, वानिकी के संग,
मेहनतकश हाथों ने लिखा रंग!
पच्चीस बरस का यह सफर बेमिसाल,
झारखंड बोले “हमारा जलवा है कमाल!”
(शाहबाज आलम “शाज़” युवा कवि स्वरचित रचनाकार सिदो-कान्हू क्रांति भूमि बरहेट सनमनी निवासी )