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10 Nov 2025 · 1 min read

शिव शंकर नटराज से, विनती बारम्बार।

शिव शंकर नटराज से, विनती बारम्बार।
नृत्य कला का ज्ञान भर, दो जीवन आधार।।
हूँ वैरागी के शरण, फिर क्यों कुंठित जाग।
जटा-जूट आओ जरा, भरने को अनुराग।।
हे महेश कर दो कृपा, शरणागत पर आज।
जीवन मेरा हो सफल, पूर्ण सभी कर काज।।
गौरी गणेश संग में, आप बसे कैलाश।
आना है प्रभु आपको, हरने को हर पाश।।
हे गंगाधर आपको, “पाठक” करे पुकार।
आशा केवल आपकी, जिससे हो उद्धार।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)

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