तेरी याद
तेरी याद
चाँदनी जब भी तेरी ज़ुल्फ़ों से बिखर कर जाती है,
स्याह रात की रूह तक रौशनी में नहा जाती है।
तेरी पलकों की छाँव में मिलता है सुकून दिल को,
जैसे तपती हुई धरती पर बारिश उतर जाती है।
तू जो देखे तो हर दर्द भी मुस्कुराता है मेरा,
तेरी निगाहोँ में जैसे जमाने की दवा समा जाती है।
तेरे लबोँ की हँसी से महकता है गुलशन सारा,
तेरी बातों में जैसे बहारें भी ठहर जाती हैं।
तेरे क़दमों की आहट से जागे हैं ख्वाब मेरे,
आंखेँ नींद से पहले तेरी यादोँ से भर भर जाती है।
इति।
संजय श्रीवास्तव
बालाघाट मध्यप्रदेश
९.११.२०२५