आओ बैठें पास
मुक्तक
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आओ बैठें पास, झंझट सारे छोड़ कर।
होना नहीं उदास, कहीं भी मुंह मोड़ कर।
मिट जाएंगे कष्ट, हमारे सहज ही सभी।
करते रहें प्रयास, पुराने सूत्र जोड़ कर।
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खूब खिले हैं फूल, भाव स्नेह के जग रहे।
रहे हवा में झूल, मन को मोहक लग रहे।
सभी देखते नित्य, भांति भांति के रंग हैं।
करते कभी न भूल, बढ़े दिशा में पग रहे।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य