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9 Nov 2025 · 2 min read

*मैं बाबा साहब का हर घर में, पैगाम सुनाने आया*

मैं बाबा साहब का हर घर में, पैगाम सुनाने आया

सोच थी जिसकी सालो आगे, वंचितों के थे वो भाल।
सामाजिकता के अद्वितीय नायक, ज्ञान में थे वो विशाल।
समाज को जिसने बदला आकर, ऐसे थे समाज सुधारक।
नारी को इज्जत दिलाकर, बन गए वो नारी उद्धारक।
इसके लेख किताबें चर्चित, ठुकरा दिया जिसने आराम।
उस महामानव की मैं सबसे, पहचान कराने आया हूंँ।
मैं बाबा साहब का हर घर में, पैगाम सुनाने आया हूंँ।।१।।
जो थे निर्भीक निडर धैर्यवान, मनुस्मृति के थे नाशक।
अर्थशास्त्र के श्रेष्ठ जानकार, बुद्ध के थे वो उपासक।
वो जातिवाद के थे बैरी, वो इंसानियत के थे प्रहरी।
वो हर दबे कुचालों की थे आवाज, वो दुनिया के थे सरताज।
जो ज्ञान के प्रतीक आधुनिक युग के मनु, संविधान के निर्माता।
ऐसे भाग्य विधाता पर, कविता पढ़ने आया हूंँ।।२।।
बदल दिया इतिहास जिसने, बनकर इतिहास के पाठी।
लाखों किताबें पढ़ कर दिखाईं, किताबों के बन गए साथी।
पर्सनल लाइब्रेरी सबसे बड़ी, उच्च कोटि के थे विद्वान।
अंग्रेज कहते चलती फिरती यूनिवर्सिटी, बाबा थे इतने महान।
जो लक्ष्य पर अडिग रहा, कभी नोटों में तुला नहीं।
मैं उस लीडर गोलमेज का, इतिहास बताने आया हूंँ।
मैं बाबा साहब का हर घर में, पैगाम सुनाने आया हूंँ।।३।।
शिक्षित बनाकर कम करो सब, संगठित हो प्रहार करो।
जीवन लंबा नहीं महान होगा, संघर्ष इस प्रकार करो।
बाबा साहब को पढ़ो लिखो तुम, मानवता को गले लगाओ।
हम सबसे पहले अंत में हैं भारतीय, इस पर तुम चलते जाओ।
शिक्षा है शेरनी का दूध, पीकर इसको दहाड़ लगाओ।
बाबा साहब की शिक्षा का, मैं दुष्यन्त कुमार सार सुनाने आया हूंँ।
मैं बाबा साहब का हर घर में, पैगाम सुनाने हूँ।।४।।

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