माहिया
माहिया
०१
तुम ख्वाबों को छू लो
पल- भर मैं, जी लूँ
पल -भर तुम भी, जी लो
🍁 ०२
मिलना मधुमासों- सा
आज तलक दहका
स्पर्श पलाशों -सा
🍁 ०३
नेहिल मन ये नत है
साँसों की समिधा
शब्दों के अक्षत हैं
🍁 ०४
धड़कन दुल्हन मेरी
सजती गीतों से
मिल चितवन से तेरी
🍁 ०५
प्राणों से है प्यारा
है स्वर साँसों का
माहिया बड़ा न्यारा
डॉ .रागिनी स्वर्णकार, शर्मा
इंदौर
माहिया
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माहिया एक पंजाबी लोकगीत और तीन पंक्तियों वाला मात्रिक छंद है।
माहिया छंद का विधान
पंक्तियों की संख्या-तीन
मात्राएँ
पहली पंक्ति में 12 मात्राएँ।
दूसरी पंक्ति में 10 मात्राएँ।
तीसरी पंक्ति में 12मात्राएँ।
पहली और तीसरी पंक्ति तुकान्त होती है।
यह वियोग श्रृंगार (प्रेमी-प्रेमिका के बिछड़ने का) या करुण रस प्रधान छंद है।
हाइकु
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हाइकु एक जापानी काव्य शैली है जिसमें तीन पंक्तियाँ होती हैं। पहली में 5, दूसरी में 7 और तीसरी में 5 अक्षर होते हैं (कुल 17 अक्षर)। यह कम शब्दों में गहरा अर्थ व्यक्त करने वाली एक छोटी कविता है जो अक्सर प्रकृति या किसी क्षण को दर्शाती है।