अनाथ बच्चों की सेवा हमारा धर्म है: डॉ. सुनील चौरसिया 'सावन'
सावन साहित्य सेवा सदन में कवि गोष्ठी एवं शोक सभा सम्पन्न
मधुर साहित्य सामाजिक काव्य संस्था, लक्ष्मीगंज और सावन साहित्य सेवा सदन के बैनर तले संयुक्त रूप से 127 वीं कवि गोष्ठी साहित्यकार डॉ. सुनील चौरसिया ‘सावन’ के आवास पर अटल नगर (अमवा बाजार), नगर पंचायत- रामकोला, जनपद- कुशीनगर, उत्तर प्रदेश में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। दीपक प्रज्ज्वलन के पश्चात् कवि बलराम राय ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कवियों ने हिंदी और भोजपुरी में प्रतिनिधि कविताएं एवं गीता प्रस्तुत कर तालियां बटोरीं। मुख्य अतिथि कवि मधुसूदन पांडेय ने ‘बचपन में बाबूजी स्वर्ग सिधारीं, कोखिया के जनमल काहें देहलू बिसारी’ सुनाकर सबको भाव विभोर कर दिया। सावन साहित्य सेवा सदन के अध्यक्ष एवं शिक्षक डॉ. सुनील चौरसिया सावन ने कहा कि अनाथ बच्चों की सहायता करना हमारा धर्म है तथा ‘जो अनाथों के नाथ हैं, उन्हीं में भोलेनाथ हैं’ सुनाकर तालियां बटोरीं। उन्होंने कवि गोष्ठी में उपस्थित कबीरपंथी संतों, विचारकों एवं समाजसेवियों के समक्ष अपना मर्मस्पर्शी गीत ‘जब आएगा बुलावा तब जाना पड़ेगा, स्वामी जी से सच-सच बताना पड़ेगा’ प्रस्तुत कर अध्यात्म की सरिता प्रवाहित की।
विशिष्ट अतिथि एवं कथा वाचक गोमल यादव ने किसान के जीवन को समर्पित कविता प्रस्तुत की ‘दांवल बाटे धनवा के पुअरा, भुंइयां बिछौना लगाइ द।’ भोजपुरी गीतकार उगम चौधरी ने अपने गीतों से कवि गोष्ठी को नयी ऊंचाई प्रदान की।
लोक गायक दयानंद सोनी ने श्रृंगार परक गीत प्रस्तुत किया। सुरेंद्र प्रसाद गोपाल ने हर मुश्किल भी गुजर जाते हैं, टूटे दिल भी संवर जाते हैं.. सुनाकर तालियां बटोरीं।
डॉ. सुनील चौरसिया ‘सावन’ ने मंच संचालन किया तथा सावन साहित्य सेवा सदन के संस्थापक रामकेवल चौरसिया ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
अंत में कवियों के द्वारा स्मृतिशेष पद्मश्री साहित्यकार रामदरश मिश्र की स्मृति में शोक सभा आयोजित की गयी। वह एक भारतीय कवि, लेखक और शिक्षाविद् थे, जिनका साहित्यिक जीवन अनुकरणीय रहा।
कार्यक्रम का समापन अध्यक्ष के उद्बोधन से हुआ। इस अवसर पर श्रोतागण के रूप में समाजसेवी मुन्ना यादव, सुभाष दुबे ,प्रीति, सुप्रीति चौरसिया, आराधना पांडेय, रामकेवल चौरसिया, उर्मिला देवी , प्रियंका, शैलेश , जालन्धर कुमार संदीप, शैलेंद्र चौरसिया, सत्या , सोना, पिन्टू, वन्दना, इत्यादि उपस्थित रहे।