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9 Nov 2025 · 1 min read

कहाँ किसी का छीन कर,

कहाँ किसी का छीन कर,
मिला किसी को चैन ।
बोध अपराध का छीनता,
उससे उसकी रैन ।।
सुशील सरना / 9-11-25

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