आख़िरी पायदान की हार” 💔
आख़िरी पायदान की हार” 💔
हर बार लगा — इस बार तो बदलेगा नसीब,
मेहनत की हर बूंद में था यकीन अजीब।
रातें जलीं, सपने तपे, उम्मीदें खड़ी रहीं,
पर नतीजे ने फिर वही पुरानी कहानी कही।
बस एक कदम दूर थी वो मंज़िल सुनहरी,
फिर किस्मत ने मोड़ लिया रुख, राह ठहरी।
मन टूट गया, पर आँखों ने सवाल किया —
“क्यों आख़िरी पायदान पर साथ छोड़ दिया?”
वो दर्द केवल असफलता का नहीं होता,
वो उन सालों का हिसाब होता है जो लौटता नहीं होता।
हर वो पन्ना, हर नोट, हर दिन का त्याग,
सब आँखों के सामने धुंध में खो जाता एक आग।
फिर भी दिल में कहीं एक उम्मीद बची रहती है,
वो हार नहीं, बस ठहराव की कहती है।
क्योंकि जो आख़िरी पायदान पर भी नहीं झुकता,
वही कल सफलता का शिखर छूता। ✍️