आत्मबल एक मित्र जीवन का
जीवन राग मधुर लिखूं, या जीवन को एक जंग लिखूं
भागम भाग भरे जीवन में ,कैसे दो पल सुकून लिखूं
छूट रहे है कुछ अपने
टूट रहे हैं कुछ सपने
समय का मोती कहा से लाऊ
सपनो की रात कैसे सजाऊं
जीवन को सुंदर बाग लिखूं,या कांटो भरा एक पथ लिखूं
उलझी हुई है जीवन की राहें ,कैसे सुगम एकं पथ लिखूं
मिल रहे है गम के कुछ साए
मिल रहे है उदासी के पहरे
मनोबल की ज्योत कैसे जलाऊ
संयम की बागडोर कैसे संभालू
जीवन को गहरा सागर लिखूं,खुद को एक नौका लिखूं
तूफानी हवाओं से संघर्ष करु,खुद को इतना प्रबल लिखूं
लहरों के थपेड़ों से हारूं नहीं
तूफानी हवाओं से घबराऊं नहीं
खुद को बने पतवार मनोबल की
संयम संग करु मै जीवन सागर पार
संयम संग करु मै जीवन सागर पार
जब आप खुद गिरकर संभलना सीख जाते है ,जब आप खुद रो कर खुद चुप होना सीख जाते है ,जब आप खुद हार कर खुद अपनी हार को हराना सीख जाते है और टूटते टूटते खुद को हिम्मत देना सीख जाते हैं तब आप जीवन में प्रबलता के साथ एक विजय पताका फहराते है
क्योंकि आप जीवन अंधकार को चीर कर एक उज्वल उम्मीद की किरण बनकर चमकते है
निरंजना डांगे
बैतूल मध्यप्रदेश