लेखक कुल में स्थान नहीं है
किसी विधा का ज्ञान नहीं है।
सही ग़लत पर ध्यान नहीं है।
वरिष्ठ कवि कहते हैं खुद को,
किन्तु जगत में मान नहीं है।।
जिनका सुन्दर गान नहीं है।
स्वर लहरी में तान नहीं है।
सिर्फ चुटकुलेबाजी करते,
कवि गरिमा का भान नहीं है।।
बिना छंद कवि शान नहीं है।
होता जग गुणगान नहीं है।
जो लिखते बस तुकबंदी कर,
लेखक कुल में स्थान नहीं है।।
स्वरचित रचना-राम जी तिवारी”राम”
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)