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8 Nov 2025 · 1 min read

जब मंद-मंद तुम हँसती हो

निरख नयन अति सुख मिलता है,जब मंद -मंद तुम हँसती हो।
हृदय प्रफुल्लित हो जाता है,जब मीठी बातें करती हो।।

तेरी मनमोहक प्रिय सूरत, मेरे मन को अति भाती है।
हृदय ढोल जाता है मेरा,चुनरी जब-जब लहराती है।
तेरे मीठे शब्द सुरीले,मन पर जादू कर जाते हैं।
काले कजरारे दो नैना,अंतस पर तीर चलाते हैं।

गज गामिनी की तरह चलती,धीरे-धीरे पग धरती हो।
निरख नयन अति सुख मिलता है,जब मंद-मंद तुम हँसती हो।।

झील की तरह नीली आँखे, जानें कितनी गहराई है।
नाक कीर के‌ जैसे सुन्दर,अति नाजुक हाथ कलाई है।
जूडे में फूलों का गजरा,कमर करधनी सुन्दर धारे।
लाल चुनरिया सर पर ओढ़े, श्वेत वस्त्र तन सुन्दर न्यारे।

प्रतिदिन सपनों में आ करके,तुम नींद रात्रि की हरती हो।
निरख नयन अति सुख मिलता है,जब मंद-मंद तुम हँसती हो।।

कानन कंचन कुंडल न्यारे,गले नौलखा हार विराजे।
रत्नजड़ित माथे पर टीका, लाल-लाल चूड़ी कर साजे।।
लाल ओठ मधु रस के प्याले,काले घन कुंतल घुँघराले।
पाँव पैंजनी छम-छम बाजे,गाल गुलाबी गजब निराले।

स्वप्न सलोना बनकर मेरे, प्राण प्रिये दिल में बसती हो।
निरख नयन अति सुख मिलता है,जब मंद-मंद तुम हँसती हो।।

तेरी मीठी बातें हमको,चैन से न सोने देतीं हैं।
तेरी मीठी यादें हमको,किसी का न होने देती हैं।
जगते सोते हर इक कण में,तुमको बस देखा करते हैं।प्राणों से हो प्यारी हमको ,इक बस हम तुम पर मरते हैं।

हमें ज्ञात है तुम भी केवल,इक बस हम पर ही मरती हो।
निरख नयन अति सुख मिलता है,जब मंद-मंद तुम हँसती हो।।

स्वरचित रचना-राम जी तिवारी”राम”
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)

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