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8 Nov 2025 · 1 min read

ख़ामोश बरगद

आरव की आख़िरी विदाई के बाद सिया फिर उसी बरगद के पेड़ के नीचे पहुँची —
जहाँ उनकी पहली मुलाकात हुई थी।
बरगद अब भी वहीं था,
लेकिन उसकी छाँव में अब एक सन्नाटा था।

सिया ने ज़मीन पर बैठकर कहा —
“आरव… तूने जो मोहब्बत दी, वो आज भी मेरी रूह में ज़िंदा है…”
हवा चली, पत्ते झूमे, जैसे आरव की आत्मा जवाब दे रही हो।
सिया के होंठ काँपे —
“अब मैं हर रोज़ यहीं आऊँगी, तेरी यादों से मिलने…”

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