यादों की महक
अगले कुछ दिनों तक सिया और आरव मिलने लगे।
कभी चाय पर, कभी पुराने मंदिर के पास।
दोनों ने ज़िंदगी के सारे अधूरे पन्ने फिर से पलटने शुरू किए।
सिया ने कहा —
“जानते हो, आर्यन को पढ़ते हुए तुम्हारी बातें याद आती हैं…
तुम अब भी वैसे ही सिखाते हो, जैसे पहले बोलते थे — सुकून से।”
आरव ने कहा —
“शायद इसलिए, क्योंकि मैंने सिखाया ही उस मोहब्बत से है जो कभी खत्म नहीं हुई।”
सिया मुस्कुरा दी, पर उसकी आँखों में नमी थी।
दोनों जानते थे कि अब वक्त ज़्यादा नहीं है।
वक़्त फिर उन्हें जुदा करने की तैयारी में था।