अतीत की परछाइयाँ
उस रात आरव पूरी रात सो नहीं पाया।
“सिया…?” यह नाम उसके दिल में जैसे किसी तूफ़ान की तरह गूंज रहा था।
क्या सच में वो वही सिया है?
क्या यह कोई इत्तफ़ाक है या किस्मत का इशारा?
अगले दिन आर्यन स्कूल आया।
आरव ने उससे बड़े प्यार से पूछा —
“बेटा, तुम्हारी मम्मी कभी स्कूल आती हैं?”
आर्यन बोला — “हाँ सर, पैरेंट्स मीटिंग में आएंगी।”
आरव के दिल की धड़कन बढ़ गई।
उसे लगा जैसे बरसों की तन्हाई अब जवाब देने वाली है।