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8 Nov 2025 · 1 min read

वक़्त का सफ़र

वक़्त निकलता गया।
आरव अब स्कूल का प्रिंसिपल बन चुका था।
सिया अब दो बच्चों की माँ थी।
पर दोनों के दिल में एक ही खाली जगह थी — एक-दूसरे की।

एक दिन सिया के बेटे ने पूछा —
“माँ, क्या सच्चा प्यार वाकई होता है?”
सिया ने मुस्कुराकर कहा —
“हाँ बेटा… होता है, पर हर किसी को मुकम्मल नहीं मिलता।”

उसकी आँखों में वो बरगद झलक गया, वो शाम, वो मुस्कान —
जो अब सिर्फ यादों में थी।

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