सिया की दुनिया
सिया अब शहर के बड़े घर की बहू थी।
बाहर से सब कुछ परफेक्ट था — बड़ा घर, पैसा, सम्मान।
पर अंदर से वो अकेली थी।
उसका पति दिन-रात बिज़नेस में खोया रहता,
और सिया चुपचाप अपने कमरे में बैठी पुरानी डायरी में कुछ लिखती रहती।
हर पन्ने की शुरुआत बस एक ही नाम से होती — “आरव”।
वो बरगद के नीचे के हर लम्हे को बार-बार पढ़ती,
मानो उन पन्नों में अब भी वो सांस ले रही हो।