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8 Nov 2025 · 1 min read

इज़हार-ए-मोहब्बत - 3

उस शाम आसमान में बादल थे। हवा में ठंडक और दिलों में गर्माहट।
आरव ने तय कर लिया था — आज वो सिया से सब कहेगा।

हाथ में गुलाब और आँखों में डर लिए, वो बरगद के नीचे खड़ा था।
सिया आई, हल्की गुलाबी साड़ी में, मुस्कान जैसे सुबह की धूप।

आरव धीरे से बोला —
“सिया… मैं नहीं जानता ये प्यार है या पागलपन,
पर तेरे बिना सब खाली लगता है।”

सिया की आँखें नम हो गईं, उसने बस इतना कहा —
“अगर ये पागलपन है, तो मुझे भी होने दो…”

उस पल जैसे सारी दुनिया थम गई।
बरगद के नीचे दो दिलों ने वक़्त को रोक दिया था।

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