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8 Nov 2025 · 1 min read

दोस्ती से मोहब्बत तक - 2

अब आरव और सिया की बातें रोज़ की आदत बन गई थीं।
कभी बारिश में भीगते हुए बातें होतीं, कभी चाय की दुकान पर हँसी-मज़ाक।
सिया को आरव की मासूमियत भाने लगी, और आरव को सिया की चंचलता।

एक दिन सिया ने पूछा —
“तुम इतने शांत कैसे रहते हो? कभी गुस्सा नहीं आता?”
आरव बोला — “गुस्सा तब आता है जब दिल में प्यार नहीं होता… और मेरे दिल में तो बस सुकून है।”

सिया मुस्कुरा दी — “और वो सुकून कौन देता है?”
आरव ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा — “शायद तुम…”

सिया शरमा गई। हवा में कुछ बदल गया था — अब वो सिर्फ दोस्त नहीं रहे।
बरगद के नीचे अब किताबों से ज़्यादा धड़कनों की आवाज़ सुनाई देने लगी थी।

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