चला है राह पर जो शख़्स, वो जुमला नहीं होगा
ताज़ा ग़ज़ल
चला है राह पर जो शख़्स, वो जुमला नहीं होगा ,
गुले गुलज़ार होगा वो , कभी मैला नहीं होगा ।1.
वतन के वास्ते जिसने , उड़ाई ख़ाक राहों में ,
मिला ख़ुद्दार अपनों को ,वो बस छैला नहीं होगा ।2.
तुम्हारी आँख में आंसू ,भला क्यूँ कर चमकते हैं ,
यकीं है अश्क़ बहने का ,बड़ा मसला नहीं होगा ।3.
ज़मीं पर नेक नीयत से चलो , अहसान मानो सब ,
मिलन होगा कभी जब भी ,वहाँ हमला नहीं होगा।4.
नहीं डरना क़यामत से ,यक़ीनन आएगी इक दिन,
करो आमाल बेहतर तुम , उधर जाला नहीं होगा ।5.
बनी जब से है दुनिया , आग के अंगार पर चलती ,
जलेगा आग में जो भी , कभी उजला नहीं होगा ।6.
यहाँ करते रहो ख़िदमत , ग़रीबी हो ,अमीरी हो ,
बुराई का बुराई से , कभी बदला नहीं होगा ।7.
करम कर “नील”, तू ख़ामोश ,मत होना गुनाहों पर,
सभी कुछ हाथ में होगा , मगर झोला नहीं होगा ।8.
✍️नीलोफर ख़ान नील रूहानी..
शब्दार्थ
जाला” _ सहारा , क़यामत _ प्रलय,
आमाल _ अच्छे और बुरे काम।