आखिरी पन्ना
अब आखिरी पन्ना है कहानी का
है आखिरी कुछ किरदार
आंखों के कुछ आखिरी पलखे है
है आखिरी कुछ त्यौहार ।
कुछ आखिरी सांस बाकी है
है कुछ आखिरी मुलाक़ात
कुछ आखिरी आंसू गिरा है
सहमी हुई कुछ जस्बात ।
कुछ चंद लब्ज़ बचा है
कुछ आखिरी दास्तान
कुछ अपनों को देखना बाकी है
अधूरी है कुछ अरमान ।
फिर एक दिया बुझेगा
जो न होगा कभी आबाद
एक पंछी शोर कर रहा है
जो होने वाला है आजाद ।
कुछ ऐसा है दस्तूर ज़िंदगी का
बीरान और सुनसान
ये कुछ आखिरी लब्ज़ है कहानी का
फिर आखिरी होगा एक इंसान।