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8 Nov 2025 · 1 min read

कुण्डलिया छंद

!! श्रीं !!
सुप्रभात!
जय श्री राधेकृष्ण !
शुभ हो आज का दिन !
🙏
माटी की यह देह है, पड़ी धरन रह जाय ।
प्राण तत्व तज देह को, जाने कित बह जाय ।।
जाने कित बह जाय, मोह पर कभी न टूटे ।
संग्रह जो भी किया, यहीं पर सब कुछ छूटे ।
‘ज्योति’ त्याग अब मोह, उमर सब यों ही काटी।
मिले नीर से नीर , मिले माटी से माटी।।
***
महेश जैन ‘ज्योति’,
मथुरा ।
🌷🌷🌷

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