कभी मिलो बैठ के बताएंगे
कभी सुबह का धुप बनके
कभी बारिश की पानी
मिले जो मौका हर बार सताएंगे
कभी मिलो बैठ के बताएंगे ।
दरिया तू साहिल तू
लहरों भरी सागर की कस्ती तू
और क्या क्या है तुझपे कभी नजम लिखेंगे
कभी मिलो बैठ के बताएंगे ।
तेरी जुल्फे सवरू आंखे निखारू
करू पूरी हर एक ख्वाइश
दे इजाजत तो हर हक जताएंगे
कभी मिलो बैठ के बताएंगे ।
सदाबहार के पन्नों से लब्ज़ लिए
दिल की हर बात बताएंगे
खैर आज तो वक्त नहीं
कभी मिलो बैठ के बताएंगे ।