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7 Nov 2025 · 1 min read

कभी मिलो बैठ के बताएंगे

कभी सुबह का धुप बनके
कभी बारिश की पानी
मिले जो मौका हर बार सताएंगे
कभी मिलो बैठ के बताएंगे ।

दरिया तू साहिल तू
लहरों भरी सागर की कस्ती तू
और क्या क्या है तुझपे कभी नजम लिखेंगे
कभी मिलो बैठ के बताएंगे ।

तेरी जुल्फे सवरू आंखे निखारू
करू पूरी हर एक ख्वाइश
दे इजाजत तो हर हक जताएंगे
कभी मिलो बैठ के बताएंगे ।

सदाबहार के पन्नों से लब्ज़ लिए
दिल की हर बात बताएंगे
खैर आज तो वक्त नहीं
कभी मिलो बैठ के बताएंगे ।

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