लहर तो दोनों की दूरी पाटती है
लहर तो दोनों की दूरी पाटती है
खुद नदी अपना किनारा काटती है
रात तो यूँ ही हुई बदनाम लेकिन
रौशनी अक्सर अँधेरा बाँटती है
चाँद तारों से शिकायत कर रहा है
चाँदनी बेबात उसको डाँटती है
जानते हो क्या अना की तुम हक़ीक़त
वो तो शाहों के ही तलवे चाटती है