शाज़ कहते हैं —
शाज़ कहते हैं —
मत ढूँढो सुकून इस भीड़ में, यह तो मौन की गहराई में मिलता है। जहाँ न चाह है, न गिला, बस “मैं” और “मेरा रब” मिला।
शाहबाज आलम “शाज़”
शाज़ कहते हैं —
मत ढूँढो सुकून इस भीड़ में, यह तो मौन की गहराई में मिलता है। जहाँ न चाह है, न गिला, बस “मैं” और “मेरा रब” मिला।
शाहबाज आलम “शाज़”